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महिला उद्यमिता, जी-20 में भारत के लिए एक प्रमुख स्तंभ

डॉ. संगीता रेड्डी और सुश्री अन्ना रॉय  
भारत की सर्वाधिक महत्वपूर्ण विकास और समानता प्राथमिकताओं में से एक है- महिला उद्यमिता को बढ़ावा देना। यह एक शक्तिशाली माध्यम है, जो भारत की 5 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनने की यात्रा को गति दे सकता है। इसके अलावा, यह उन सबसे महत्वपूर्ण घटकों में से एक है, जो घरेलू आय बढ़ाने, गरीबी को कम करने और 2030 संयुक्त राष्ट्र सतत विकास लक्ष्यों (एसडीजी), विशेष रूप से लैंगिक समानता से सम्बन्धित एसडीजी-5 को हासिल करने में सहायता कर सकते हैं।

भारत में नारी शक्ति को प्रोत्साहन देने की बात, विभिन्न सरकारी पहलों में परिलक्षित होती है। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन ग्रामीण महिलाओं की उद्यमशीलता को सहायता प्रदान करता है, जिसके तहत 7.5 मिलियन स्वयं-सहायता समूहों से 80 मिलियन से अधिक महिलाएं जुड़ी हुई हैं। मुद्रा योजना, वित्त तक पहुंच को सक्षम बनाती है और जेम (जीईएम) पोर्टल सभी सरकारी खरीद का 3 प्रतिशत महिला उद्यमियों के लिए आरक्षित करता है। नीति आयोग के शोध से संकेत मिलता है कि महिलाओं उद्यमिता को स्थायित्व प्रदान करने, स्वायत्त बनाने तथा औपचारिक क्षेत्र में लाने के लिए सहायता देने की आवश्यकता है। इन उद्यमों की रोजगार सृजन क्षमताओं का विभिन्न शोधपत्रों और रिपोर्टों में उल्लेख किया गया है, जो समाज एवं अर्थव्यवस्था के लिए अतिरिक्त लाभ पैदा करने में सक्षम हैं।

अपनी जी-20 अध्यक्षता के तहत, भारत ने आठ प्राथमिकता वाले क्षेत्रों की पहचान की है, जिसमें अन्य के साथ-साथ महिलाओं के नेतृत्व वाले विकास और सार्वजनिक डिजिटल अवसंरचना शामिल हैं। इसके अलावा, महिला एवं बाल विकास मंत्रालय के नेतृत्व में महिलाओं के आर्थिक प्रतिनिधित्व के सशक्तिकरण और प्रगति के लिए जी-20 गठबंधन (जी20 एम्पॉवर) का उद्देश्य महिलाओं के विकास से सम्बन्धित नैरेटिव को महिलाओं के नेतृत्व वाले विकास में परिवर्तित करना है। महिला उद्यमी इस बदलाव के केंद्र में हैं और जी-20 एम्पॉवर का नेतृत्व कर रही हैं।

हमें चुनौतियों को अवसरों में बदलना चाहिए और अधिक से अधिक महिलाओं को कार्यबल तथा महिलाओं के नेतृत्व वाली उद्यमिता में शामिल करने के लिए बदलाव को तेज करना चाहिए। जैसा एसडीजी प्रदर्शित करते हैं, महिला-केन्द्रित दृष्टिकोण अपनाने और महिलाओं को अधिक अवसर प्रदान करने की संस्कृति के निर्माण के लिए, हमारे देश में और विश्व स्तर पर सहयोग-आधारित एवं ठोस कार्रवाई करने की आवश्यकता है।

डिजिटलीकरण एक अत्यंत प्रभावशाली माध्यम है जो महिलाओं की आर्थिक भागीदारी को मजबूत करने में काफी मददगार साबित हो सकता है। इसके अलावा, ऐसे कई क्षेत्र हैं जहां अपने संस्थान के कार्यालय से काफी दूर रहकर भी सतत रूप से अपना आधिकारिक कामकाज निपटाना बिल्कुल संभव है और इसके साथ ही यह महिला श्रमबल को रोजगार प्रदान करने का व्यापक अवसर भी प्रदान करता है। जी-20 सशक्तिकरण प्लेटफॉर्म के जो तीन प्राथमिकता वाले क्षेत्र हैं उनका उद्देश्य इन संवादों को निम्नलिखित दृष्टिकोणों के जरिए ठोस कदमों में परिवर्तित करना है।

पहला, महिला उद्यमिता पर ध्यान केंद्रित करें: महिलाओं के नेतृत्व वाले और महिलाओं के स्वामित्व वाले व्यवसायों को बढ़ावा देने के लिए कौशल विकास, क्षमता निर्माण, सहायक बुनियादी ढांचागत सुविधाओं और वित्त तक महिलाओं की पहुंच बढ़ाएं। दूसरा, महिलाओं के नेतृत्व को बढ़ावा देने के लिए साझेदारी सुनिश्चित करें जिसका उद्देश्य उनका सार्वजनिक प्रतिनिधित्व बढ़ाना, सार्वजनिक सुविधाओं तक उनकी पहुंच बनाना, और सार्वजनिक एवं निजी क्षेत्रों के श्रमबल में उनकी भागीदारी बढ़ाना हो। तीसरा, शिक्षा की दिशा में काम करें जो निर्णय लेने वाली भूमिकाओं में महिलाओं के प्रतिनिधित्व को सुविधाजनक या काफी आसान बना देती है।

महिला उद्यमिता प्लेटफॉर्म (डब्ल्यूईपी) ज्ञान की खाई को पाटने में एक अत्यंत महत्वपूर्ण माध्यम है: जिस तरह से भारतीय महिलाएं और बालिकाएं शिक्षा प्रणाली से आगे निकल कर नौकरी करने की दुनिया की ओर तेजी से कदम बढ़ा रही हैं और स्वयं के जीवन में व्यापक बदलाव ला रही हैं, उसे देखते हुए यह कहा जा सकता है कि भारत उन 55 मिलियन अतिरिक्त महिलाओं के लिए एक मजबूत उद्यमिता मार्ग बना रहा है जो वर्ष 2030 तक संबंधित श्रमबल का हिस्सा बन सकती हैं।

वैश्विक उद्यमिता शिखर सम्मेलन 2017 में घोषणा किए जाने के बाद डब्ल्यूईपी के अभिनव आइडिया को नीति आयोग में मूर्त रूप दिया गया। आज यह एक मजबूत सार्वजनिक-निजी भागीदारी का एक उत्कृष्ट उदाहरण है, जो महिला उद्यमियों को बहुक्षेत्रीय सहयोग प्रदान करता है। यह जागरूकता, प्रशिक्षण, कौशल विकास, वित्त और विपणन संबंधी आवश्यकताओं तक पहुंच के जरिए बड़ी संख्या में महिला उद्यमियों को तैयार कर रहा है। डब्ल्यूईपी इसके साथ ही डेटा सृजित करके एक उत्कृष्ट विचारक के रूप में भी उभर कर सामने आया है जो महिलाओं के नेतृत्व और मानसिक सेहत पर विशेष रूप से ध्यान केंद्रित करते हुए महिलाओं की उद्यमशीलता की जरूरतों को बेहतर ढंग से समझने में मदद करता है। इसके साथ ही यह योजना भी बनाई गई है जिसके तहत प्रौद्योगिकी और विभिन्न बाधाओं को कम करने पर विशेष जोर दिया गया है,  ताकि तेजी से प्रगति सुनिश्चित करने के लिए किसी पारंपरिक स्टोर में काम करने के दृष्टिकोण को अनिवार्य किए बिना ही महिलाएं तरह-तरह की दक्षताओं से लाभ उठा सकें।

भारत की जी-20 अध्यक्षता वाले इस वर्ष में पूरी दुनिया विभिन्न संस्थानों, देशों, पहलों और लोगों के बीच बेहतरीन सहयोग की साक्षी बनेगी। यह भारत की अद्भुत ‘नारी शक्ति’ को भी दर्शाएगा, जिनमें से सभी समृद्ध समाजों और अर्थव्यवस्थाओं के अग्रणी के रूप में उभर कर सामने आएंगे।

संगीता रेड्डी अपोलो हॉस्पिटल्स की संयुक्त प्रबंध निदेशक, फिक्की की पूर्व अध्यक्ष, सशक्तिकरण-20 की अध्यक्ष और डब्ल्यूईपी की संचालन समिति की सह-अध्यक्ष हैं। अन्ना रॉय वरिष्ठ सलाहकार, नीति आयोग और मिशन निदेशक, डब्ल्यूईपी हैं।

ये इनके निजी विचार हैं।

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