उत्तराखंड

अम्बानी की कंपनी में नौकरी कर रहे बद्री केदार मंदिर के पूर्व सीईओ बीडी सिंह के जलवे बरकरार, बैकडोर से हुई बीकेटीसी में एंट्री

नियुक्त हुए मुख्यमंत्री के सलाहकार

देहरादून। बद्री-केदार मंदिर समिति में नियम विरुद्ध लगभग एक दशक से अधिक समय तक मुख्य कार्याधिकारी के रूप में नियुक्त रहे चर्चित वन सेवा के अधिकारी बीडी सिंह के जलवे अब भी बरक़रार हैं। तमाम आरोप प्रत्यारोपों के बीच सरकारी सेवा से आनन फानन में सवैच्छिक सेवा निवृति लेकर अम्बानी की रिलायंस कम्पनी में नौकरी कर रहे बीडी सिंह मंदिर समिति के एक्ट के प्रावधानों को ठेंगे पर रख कर समिति में सलाहकार के रूप में नियुक्त हो गए हैं।

बद्रीनाथ केदारनाथ मंदिर समिति अधिनियम 1939 में प्राविधान है की समिति में मुख्य कार्याधिकारी पद पर नियुक्ति भी प्रदेश सरकार मंदिर समिति की राय पर करेगी। समिति में सरकार की ओर से नियुक्त किये जाने वाले पदों के बारे में स्पष्ट प्राविधान है। लेकिन यह पहली बार हुआ है की मंदिर एक्ट के प्राविधानों के विपरीत सलाहकार की नियुक्ति की गयी है। मंदिर समिति के एक्ट में सलाहकार जैसे पद का कोई प्रावधान नहीं है। हालंकि आदेश में कहा गया है की वो अवैतनिक रूप से सलाहकार होंगे। लेकिन साथ ही यह भी कहा गया है सलाहकार को कार्यालय और वाहन की सुविधा मंदिर समिति उपलब्ध कराएगी।

कांग्रेस हो या भाजपा सरकार सभी में बीडी सिंह लगातार मंदिर समिति के मुख्य कार्याधिकारी के पद पर कब्ज़ा जमाये बैठे रहे। नियमानुसार कोई अधिकारी किसी विभाग में डेपुटेशन पर जाता है तो अधिकतम तीन वर्ष से अधिक का कार्यकाल नहीं हो सकता है। लेकिन बीडी सिंह सारे नियम कानूनों को ताक पर रख कर मंदिर समिति के मुख्य कार्याधिकारी के पद पर 11 वर्ष के करीब रहे। एक दशक से अधिक समय तक मंदिर समिति के कार्याधिकारी के रूप में कार्यरत रहने के कारण मंदिर समिति के प्रशासन और व्यवस्थाओं को उन्होंने अपने मन मुताबिक चलाया। मंदिर समिति में यह प्रचलित था की ना खाता – ना बही , जो बीडी सिंह कहे वो सही।

बीडी सिंह मंदिर समिति के मुख्य कार्याधिकारी रहने के दौरान हमेशा विवादों में रहे। उन पर भ्रष्टाचार के भी आरोप लगे। उनके कार्यकाल के दौरान की जांच अभी लंबित है। उनके कार्यकाल में नियुक्तियों से लेकर कार्मिकों के विनियमतीकरण और पदोन्नति तक के कई प्रकरण विवादों में हैं। बताया जाता है की उन्होंने मंदिर समिति में अपने कुछ ख़ास कर्मचारियों की एक टीम बनायीं थी जो उनके कहे अनुसार आँख मूँद कर काम करती थी। इस कारण मंदिर समिति के प्रति निष्ठावान कर्मचारियों का मनोबल टूट गया था। बीडी सिंह के मुहँबोले कर्मचारी सब पर हावी रहते थे।

गत वर्ष मंदिर समिति में अध्यक्ष पद पर अजेंद्र अजय की नियुक्ति के बाद बीडी सिंह का वर्चस्व समाप्त हुआ। अजेंद्र ने मंदिर समिति में अपनी पसंद के अनुरूप प्रदेश सिविल सेवा के अधिकारी योगेंद्र सिंह को मुख्य कार्याधिकारी के रूप में नियुक्त कराया। सूत्रों के मुताबिक मंदिर समिति से ट्रांसफर होने के बावजूद बीडी सिंह ने फिर से मुख्य कार्याधिकारी के पद पर तैनाती के लिए काफी प्रयास किये। इसके साथ ही उन्होंने बद्री नाथ और केदारनाथ में चल रहे मास्टर प्लान के कार्यों में अपनी नियुक्ति के लिए भी प्रयास किये। मगर तब उनके ये प्रयास सफल नहीं हो पाए। बीडी सिंह को मुख्य कार्याधिकारी पद से हटाने के धामी सरकार के निर्णय की तब काफी सराहना भी हुयी थी। सोशल मीडिया में धामी सरकार की जमकर वह वही हुयी थी।

बद्री केदार मंदिर समिति में बहाली नहीं होने पर बीडी सिंह ने सरकारी सेवा से आनन् फानन में स्वेच्छिक सेवा निवृति ले ली। सूत्रों के अनुसार स्वेछिक सेवा निवृति लेने में में विवादित अधिकारी के मामले में नियमों का पालन भी नहीं किया गया। सेवा निवृति के बाद बीडी सिंह ने प्रसिद्ध उद्योगपति अम्बानी की रिलायंस कम्पनी में जॉब शुरू कर दी। मंदिर समिति के मुख्य कार्याधिकारी रहते हुए उनके द्वारा अंबानी के साथ रिश्तों की चर्चा जग जाहिर है।

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